तुगलक वंश 


गयासुद्दीन तुगलक


 शासनकाल 1320 से 1325

 
  • गयासुद्दीन तुगलक को गाजी मलिक व तुगलक गाजी गयासुद्दीन तुगलक के नाम से भी जाना जाता था।

  • गाजी जिसका अर्थ था काफिरों का वध करने वाला।

  • ये 1320 ई. में खुशरव शाह की हत्या करके दिल्ली का सुल्तान बना था।

  • 8 सितंबर 1320 ई.को दिल्ली सल्तनत के सिंहासन पर बैठे और तुगलक वंश की स्थापना भी की।

  • गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली का सुल्तान बनने से पहले कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी के शासन काल में उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत के गवर्नर थे।

  • इसने अनेकों बार मंगोलों के आक्रमणों को असफल किया । 

  • सुल्तान बनते ही गयासुद्दीन तुगलक को प्रांतीय विद्रोहों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसने अधिकांश पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।

  • गयासुद्दीन ने अपनी आर्थिक नीति का आधार संयम, सख्ती और नरमी का संतुलन बनाया, जिसे रस्म -ए-मियान यानी मध्य पंथी अथार्त समय और परिस्थितियों के अनुसार अपनी नीतियां बनाई। 

  • गयासुद्दीन ने मध्यवर्ती जमीदारों को उनके पुराने अधिकार वापस कर दिए और अमीरों की भूमि भी वापस लौटा दी। 

  • गयासुद्दीन लगान के रूप में उपज का 1/10 या 1/12 हिस्सा ही लिया करता था। 
  • कृषि क्षेत्र को उसने बढ़ावा दिया और इसके लिए उसने कुएं व नहरों का निर्माण करवाया और शायद नहर का निर्माण करवाने वाला वह प्रथम सुल्तान था।

  • गयासुद्दीन की डाक व्यवस्था बहुत श्रेष्ठ थी, साथ ही न्याय व्यवस्था के लिए उसने एक न्याय विभाग का निर्माण करवाया था।

  • अलाउद्दीन खिलजी की तरह गयासुद्दीन तुगलक ने भी दक्षिण भारत में युद्ध अभियान किए। 

  • इसी क्रम में उसने 1321 ई. में वारंगल पर आक्रमण किया, लेकिन वारंगल के काकतीय राजा प्रताप रूद्रदेव ने उसे हरा दिया।

  • इस हार का बदला लेने के लिए गयासुद्दीन ने 1323 ई.में दूसरा अभियान अपने शहजादे जूना खां के नेतृत्व में भेजा और इस बार वारंगल के राजा प्रताप रूद्रदेव हार गए और उनके राज्य को दिल्ली सल्तनत में मिला दिया गया। 

  • इस प्रकार गयासुद्दीन के समय में ही सर्वप्रथम दक्षिण के राज्यों को दिल्ली सल्तनत में मिलाया गया। 

  • गयासुद्दीन तुगलक पूरी तरह साम्राज्यवादी था। इसने अलाउद्दीन खिलजी की दक्षिण नीति त्यागकर दक्षिण भारत के राज्यों को दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया। 

  • जाज नगर [ ओड़िशा ] में गयासुद्दीन ने जूना खाँ के नेतृत्व में सैन्य अभियान भेजा जिसमें जूना खाँ ने जाज नगर के राजा भानुदेव को हरा दिया। 

  • गयासुद्दीन का अंतिम सैन्य अभियान बंगाल के विद्रोह का दमन था, जिसके अंतर्गत बंगाल में फैली हुई व्यवस्था को समाप्त करना था। 

  • बंगाल में रहते हुए गयासुद्दीन को सूचना मिली कि जूना खाँ निजामुद्दीन औलिया का शिष्य बन गया है और वह  दिल्ली सल्तनत का सुल्तान बनेगा यह भविष्य वाणी भी निजामुद्दीन औलिया के द्वारा की गई है। 

  • गयासुद्दीन तुगलक को सूफी संत निजामुद्दीन औलिया की यह बात अच्छी नहीं लगी और उसने धमकी भरा संदेश सूफी संत को पहुंचाया। 

  • परिणामस्वरुप निजामुद्दीन औलिया ने उत्तर दिया कि "हुनूज दिल्ली दूर अस्त "  यानी दिल्ली अभी बहुत दूर है।

  • इस सारे घटनाक्रम को देखते हुए गयासुद्दीन ने बंगाल से दिल्ली की ओर कूच किया। 

  • इस बीच दिल्ली से दूर गयासुद्दीन की वापसी का स्वागत समारोह आयोजित करने के लिए जूना खाँ ने एक लकड़ी का महल अहमद अयाज से बनवाया था, जिसमें गयासुद्दीन के प्रवेश करते ही महल गिर गया और  गयासुद्दीन की मृत्यु हो गई।

  • इब्नबतूता के अनुसार गयासुद्दीन की हत्या उसके बेटे जूना खाँ के द्वारा रचे गए षड्यंत्र के द्वारा हुई थी। 

  • इस तरह से एक पिता का अंत उसी के पुत्र के द्वारा हो गया।


सारांश

गयासुद्दीन ने मात्र  पाँच वर्ष शासन किया जिसमें उसकी मुख्य उपलब्धि यह रही कि उसने -

1) - तुगलक वंश की नींव रखी।
2) - दक्षिण भारत के राज्यों को जीता और उनका विलय दिल्ली सल्तनत में किया।
3) - मंगोल आक्रमणों से दिल्ली सल्तनत की रक्षा यानी सभी बाहरी समस्याओं से जीत गया, लेकिन घर में अपने बेटे से हार गया।