रजिया सुल्तान
रजिया सुल्तान जन्म 1205 मृत्यु 1240
- इल्तुतमिश की मौत के बाद उसका बेटा रुकनुद्दीन सुल्तान बना पर वह एक अयोग्य शासक था, जिसे बंदी बनाकर उसका वध कर दिया गया था। उसने मात्र 6 माह 18 दिन शासन किया था।
- दिल्ली की जनता ने रजिया में विश्वास जताया और इस प्रकार रजिया दिल्ली की सुलतान बनी।
- लेकिन परंपरावादी व कट्टरपंथी तुर्की अमीरों ने रजिया का विरोध किया क्योकि वो यह सहन नहीं कर पा रहे थे कि एक औरत उन पर शासन करे ।
- रजिया ने सुल्तान बनने के बाद पर्दा प्रथा का त्याग कर दिया और पुरुषों के समान कूबा (कोट) वह कुलाह (टोपी) पहनने लगी थी।
- रजिया ने मलिक जमालुद्दीन याकूब को जो कि अबीसीनिया का निवासी था। उसे अमीर अखूर नियुक्त किया था जो कि अश्व शाला का प्रधान का पद होता था ।
- लेकिन उसे यह पद देने के कारण तुर्क अमीर नाराज हो गए थे।
- सरहिंद के शासक के विद्रोह को शांत करने के अभियान में याकूत की हत्या कर दी गई।
- इतिहासकार मिन्हाज -उस -सिराज कहते हैं "सुल्तान रजिया एक महान शासक थी। वह समझदार थी। ईमानदार और उदार अपने साम्राज्य की संरक्षक, इंसाफ देने वाली, अपनी प्रजा की रक्षक और अपनी सेना की सेनापति थी। उनमें वे सारे गुण थे जो एक राजा में होने चाहिए, लेकिन बस उनकी पैदाइश सही लिंग में नहीं हुई थी, इसलिए पुरुषों के विचार में उनकी ये सारी खूबियां बेकार थी।"
- कुछ समय बाद रजिया ने अल्तूनिया से विवाह कर लिया, जो भटिंडा का सरदार था, लेकिन तुर्की सरदार अब तक इन दोनों के घोर विरोधी हो चुके थे और उन्होंने 1240 ई. में इन दोनों को मार दिया।
- इस तरह एक महिला शासिका का दुखदाई अंत हुआ सिर्फ महिला होने के कारण।
- 1240 से 1242 ई. तक बहराम शाह
- 1242 से 1246 ई. तक मसूद शाह
- 1246 से 1265 ई. तक नासीरुद्दीन महमूद ने सत्ता संभाली जिसके पीछे वास्तविक बल गयासुद्दीन बलबन का


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