चालुक्य वंश

  • चालुक्य वंश दक्षिण भारत का एक प्रमुख वंश था जो समय और परिस्थितियों के अनुसार तीन शाखाओं में विभाजित हुआ।

       1) वातापी के चालुक्य 
       2)  कल्याणी के चालुक्य
       3) वेन्गी के पूर्वी चालुक्य


  • ईसा की छठी शताब्दी के मध्य से लेकर आठवीं शताब्दी के मध्य तक दक्षिणा पथ पर चालुक्य वंश की जिस शाखा का आधिपत्य रहा, उसका उत्कर्ष स्थान वातापी होने के कारण उसे वातापी के चालुक्य कहा जाता है।

  • वातापी वर्तमान बीजापुर जिले (कर्नाटक) में स्थित है।

  • वातापी के चालुक्यो ने उत्तर में हर्षवर्धन तथा दक्षिण में पल्लव शासकों के प्रबल विरोध के बावजूद लगभग 200 साल तक शासन किया।

  • चालुक्य वंश की जानकारी विशेष रूप से एहोल के लेख, सिक्कों, विदेशी विवरण आदि से मिलती है।




पुलकेशिन प्रथम 


  • ये वातापी के चालुक्य वंश के संस्थापक थे।

  • इन्होंने अश्वमेघ यज्ञ , वाजपेय यज्ञ आदि वैदिक यज्ञ का आयोजन किया था।

  • ये पुराण ,रामायण, महाभारत के ज्ञाता थे  व इनका शासन 535 ई.-566 ई. तक रहा था।

   

कीर्तिवर्मन प्रथम

ये पुलकेशिन प्रथम के पुत्र व  उत्तराधिकारी थे।




 मंगलेश

  • ये पुलकेशिन प्रथम के छोटे पुत्र व कीर्तिवर्मन के छोटे भाई थे।

  • ये शासक इसलिए बने क्योंकि जब कीर्तिवर्मन प्रथम की मृत्यु हुई तब उनका पुत्र पुलकेशिन द्वितीय अवयस्क  थे।
     



 पुलकेशिन द्वितीय


( 608 ई .-642 ई.)


  •  ये चालुक्य वंश के चौथे शासक थे।


  • इन्हें अपना राज्य ऐसे ही नहीं प्राप्त हुआ बल्कि इन्हें इसके लिए अपने चाचा मंगलेश को युद्ध में हराना पड़ा था , क्योंकि इनके चाचा ने इन्हें सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया था।

  • ये चालुक्य वंश के सबसे प्रतापी व योग्य राजा थे।

  • राजा बनते ही इनका प्रमुख उद्देश्य था।
    1) अपने गृह राज्य की बाहरी आक्रमण से रक्षा करना।
    2)  स्वाधीन हुए सामंतों को पुनःअपनी अधीनता में लाना।

  • पुलकेशिन द्वितीय का राज्य विस्तार उत्तर में नर्मदा से लेकर दक्षिण में कावेरी नदी तक फैला हुआ था।

  • 642 ई .में पल्लव नरेश नरसिहंवर्मा ने युद्ध में पुलकेशिन द्वितीय को हरा दिया था।


       
 विक्रमादित्य प्रथम 

(655-681 ई.)


642 ई. में पुलकेशिन द्वितीय की मृत्यु के बाद 642 -655 ईसवी तक चालुक्यों में सत्ता के लिए आपस में संघर्ष होता रहा।



विनयादित्य 

(681 - 696 ई.) 

ये विक्रमादित्य के पुत्र व उत्तराधिकारी थे।




विजयादित्य 

(696 -733 ई.) 

ये विनयादित्य के पुत्र व उत्तराधिकारी थे।



विक्रमादित्य द्वितीय 

(733 -747 ई.)

  इन्होंने पल्लव राजा नंदी वर्मा द्वितीय को युद्ध में पराजित किया।



 
कीर्ति वर्मन द्वितीय


  • ये विक्रमादित्य के पुत्र उत्तराधिकारी थे।
  • ये वातापी के चालुक्य वंश के अंतिम राजा थे क्योंकि राष्ट्रकूटो ने चालुक्यों की शक्ति को तहस-नहस कर दिया और उनके राज्य पर अधिकार कर लिया ।




कल्याणी के चालुक्य 

  • इन्हें पश्चिमी चालुक्य भी कहा जाता है ।

  • यह नया राज्य 973 - 1280  ई. तक सत्ता में रहा था। 
  • कल्याणी के इस चालुक्य राज्य का एक लंबे समय तक तंजोर के चोल वंश के शासकों से संघर्ष चला था।


CLICK HERE 👉 TO WATCH A VIDEO ON CHALUKYA VANSH


1) तैलप द्वितीय 

  • तैलप द्वितीय ने राष्ट्रकूट नरेश को हरा कर कल्याणी को अपनी राजधानी बना कर नए चालुक्य राज्य की स्थापना की।



2) सत्याश्रय

  • इनका शासन 997 -1006 ई. तक था। 
  • ये तेलप द्वितीय के पुत्र में उत्तराधिकारी थे।
  • इन्हें चोल नरेश राज राज ने युद्ध में हरा दिया था।



3) विक्रमादित्य पंचम

( 1006 -1015 ई.) 

  • ये  सत्याश्रय के भाई के पुत्र थे।


4)  जयसिंह द्वितीय

  • इनका शासन 1015 -1043 ई.तक था।
  • ये विक्रमादित्य पंचम के भाई थे। 



5) सोमेश्वर प्रथम 

  • इनका शासन 1043 - 1068 ई. तक था। 
  • इन्होंने सत्याश्रय की हार का बदला चोल नरेश राजाधिराज को कोप्पम के युद्ध में बुरी तरह से हरा कर लिया व इस युद्ध में सोमेश्वर प्रथम ने राजाधिराज का वध भी कर दिया।



6) सोमेश्वर दितीय 

1068 - 1076 ई.

  • इन्हें इनके भाई विक्रमादित्य षष्ठ ने कारागार में डाल दिया और स्वयं को सम्राट घोषित कर दिया।



7)  विक्रमादित्य षष्ठ

  •  1076 -1126 ई. तक शासन किया था। 
  • ये सोमेश्वर प्रथम के छोटे पुत्र और सोमेश्वर द्वितीय के छोटे भाई थे।
  • ये सोमेश्वर प्रथम के सभी पुत्रों में सबसे योग्य थे ,लेकिन सोमेश्वर द्वितीय के होते हुए ये शासक नहीं बन पाए, लेकिन अपने बड़े भाई को युद्ध में हराकर बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया जहां उसकी मृत्यु हो गई।
  • विक्रमादित्य षष्ठ विक्रमान्क के नाम से भी विख्यात थे।
  • विक्रमादित्य षष्ठ ने प्रसिद्ध कवि विल्हण को संरक्षण प्रदान किया।

  • कवि बिल्हण ने विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित "विक्रमान्कदेवचरित्र " नामक ग्रंथ लिखा, जिसमें उन्हें उदात्तचरित्र का बताया गया है।



BEST VIDEO ON CHALUKYA VANSH 

( CLICK HERE)


चालुक्य वंश की 

सांस्कृतिक उपलब्धियां


  • वातापि और कल्याणी के चालुक्य नरेशो ने हिंदू होने पर भी बौद्ध और जैन धर्म को आश्रय दिया। 

  • चालुक्य राजाओं ने अनेक मंदिरों का निर्माण कराया जैसे -विरुपाक्ष मंदिर।

  • याज्ञवल्क्य स्मृति की "मिताक्षरा" व्याख्या के लेखक और प्रसिद्ध विधिवेत्ता विज्ञानेश्वर चालुक्यों की राजधानी कल्याणी में निवास करते थे।

  • मिताक्षरा को हिंदू कानून का एक अधिकारिक   ग्रंथ माना जाता है।

  • यह ग्रंथ "जन्मना उत्तराधिकार " के सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध है।

  • 2005 में कानून में हुए संशोधन के बाद लड़कियों को भी शामिल किया गया है अर्थात पुत्र और पुत्री को समान अधिकार संपत्ति में ।



   इस प्रकार चालुक्य वंश 
का शासन अपने 
आप में प्रसिद्ध 
रहा था।